गीत

बातें जुबां पे, क्यूं आती नहीं हैं…?

बातें जुबां पे, क्यूं आती नहीं हैं, दिल बोले जितना, बताती नहीं हैं, कैसे करुं मैं, बयां दिल की बातें, एहसास भी अब, जताती नहीं हैं। दिल में बसी है, ये सूरत तुम्हारी, मन में रमी है, ये मूरत तुम्हारी, आंखें करुं बंद, जब मिलना हो तुमसे, बातें हो जाती, हमारी तुम्हारी। समझ गए सब, …

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बस चाहा है ये, ज्यादा तो नहीं

सुबह हो जब, तेरी आंखें खुले, मिलकर गले, मेरी नींद खुले, ऐ हमदम मेरे, ओ साथी मेरे, बस चाहा है ये, ज्यादा तो नहीं। हांथो से अपने, लट जो संवारा, कानों के पीछे, वो चिलमन से झांके, बांध के जूड़ा, लगे मन को फिर ये, कि बांधा है तूने, कोई भंवरा आवारा, साड़ी के पल्लू …

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ये बारिश की बूंदें

ये बारिश की बूंदें, क्यूं नम हैं ये आंखें, दिखता नहीं वो, ये दिल जिसको चाहे। टिप टिप ये गिरता, लगे जैसे रिमझिम, ये बारिश की बूंदें, क्यूं नम हैं ये आंखें। जो न मिले तुम, तो जी भर के रोऊं, अगर मिल गए तुम, तो बंद हों ये बारिश। खुला है ये मौसम, खिली …

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पर तुम न मिले

ये खुला आसमान, ये धुली सी जमीन, खिली धूप अभी, पर तुम न मिले। बादलों ने फिर छुपकर, फुहारों से भिगोया है, लगा प्यारा ये तुमसा, पर तुम न मिले। पत्ते फिर हिले हैं, फूल बन दिल खिले हैं,  पतझड़ बीत गया अब, पर तुम न मिले। कितने सावन बीत गए, रिमझिम बूंदें मीत बने, …

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